• الأردن: 00962781409934 - 00962778455550 - 00962791066457, الإمارات: 00971564999475 - 00971501299947 - 00971564880709
  • الجزائر: 0549996833, تونس: 0021695451643, بريطانيا و أوروبا: 00441902871854 - 00447519398225 - 00447517362128 - 00447519398239
  • تركيا: 00905539440472, أمريكا و كندا: 0017735728151 - 0017736162627 - 0018472850055
  • العراق: 07733000696 - 07733598900

दुनिया की सबसे बड़ी वैज्ञानिक दस्तावेज स्वास्थ्य साइट अपने परिवार की खुशी और स्वास्थ्य के लिए, विज्ञान और विश्वास के साथ हम संतुलन करते हैं

99179336

हृदय और मस्तिष्क के धमनीकाठिन्य में सहायता करने वाले पांच अद्भुत पोषक तत्व हैं: खीस - जैतून के पत्ते - ओमेगा 3 - अंगूर के बीज - लहसुन

हृदय और मस्तिष्क के धमनीकाठिन्य में सहायता करने वाले पांच अद्भुत पोषक तत्व हैं: खीस - जैतून के पत्ते - ओमेगा 3 - अंगूर के बीज - लहसुन




क्या आप हृदय या मस्तिष्क के धमनीकाठिन्य से पीड़ित हैं? क्या आपने कभी भी गलप्रदाह, मस्तिष्क आघात के बारे में सोचा है?क्या आपने इस समस्या के एकाधिक कारणों और क्रियाविधियों से छुटकारा पाने के लिए बहुत सी चीजें आजमाई हैं लेकिन उनका कोई फायदा नहीं हुआ? क्या आपने कभी ऐसा प्राकृतिक खाद्य पदार्थ चाहा है जो हृदय का धमनीकाठिन्य उत्पन्न करने वाली सभी संभावित क्रियाविधियों के विरुद्ध आपकी सहायता कर सके और आपका और आपके प्रियजनों, दोस्तों और परिवार का जीवन बचा सके?


जवाब:  कुरान की पोषण प्रणाली के सिद्धांतों में से एक है बीमारी, इसे उत्पन्न करने वाले कारकों और इसकी क्रिया प्रणाली को समझना। इसके अनुसार, हम सभी कारकों और क्रियाविधियों को लक्ष्य बनाने में सक्षम होते हैं। यदि हम सभी कारक, सभी क्रियाविधियों का उपचार कर सकते हैंतो अल्लाह की इच्छा से उपचार अपने आप प्राप्त हो जाता है। "हर रोग का उपचार है और यदि रोग के लिए सही उपचार मिल जाता है तो रोग अल्लाह की मर्ज़ी से ठीक हो जायेगा" सहीह मुस्लिम,

कई अध्ययनों ने दर्शाया है कि हमारी जीर्ण बीमारियां एकाधिक क्रियाविधियों और कारकों से उत्पन्न होती हैं। इसलिए, संतुलित पोषण प्रणाली में हमारा लक्ष्य और इसके मुख्य सिद्धांतों में से एक है रोगों के कारकों और क्रियाविधियों को समझना ताकि कोई भी जोखिम या दुष्प्रभाव उत्पन्न किये बिना उन्हें प्राकृतिक रूप से अपना लक्ष्य बनाया जा सके।   

अध्ययनों से पता चलता है कि जीर्ण बीमारियां अत्यधिक जटिल होती हैं और इनकी एकाधिक कार्यप्रणालियां भी हैं।  मैं यहाँ एक प्रश्न पूछना चाहता हूँ : क्या कोई व्यक्ति बिना किसी सहायक उपकरण के अकेले बीस मंजिल की इमारत बना सकता है? निश्चित रूप से आपका जवाब होगा नहीं

निश्चित रूप से, बीस मंजिल की इमारत बनाने के लिए हमें भवन निर्माण और सिविल इंजीनियरों, बिजली कर्मचारी, नलसाज, बढ़ई, लोहार, शीशे और एल्युमीनियम के कारीगरों, सफाई कर्मियों और अन्य टीमों की आवश्यकता पड़ेगी। उन सभी को एक साथ मिलकर बिना किसी मतभेद के काम करना होगा ताकि वे अपना काम पूरा का सकें और एक सुंदर इमारत का निर्माण हो सके।


दरअसल, हमारा मानना है कि गलप्रदाह का दर्द महसूस होने पर मरीज की धमनियों को फैलाकर, या TIA मस्तिष्क का दौरा जैसे दिमागी अरक्तताजन्य के लक्षण उत्पन्न होने पर मस्तिष्क की धमनियों को विस्तारित करके लक्षणों का उपचार करनाउचित और पूर्ण समाधान नहीं है, बल्कि यह कारणों के बजाय केवल लक्षणों का उपचार करता है। यदि हम बीमारी के लक्षणों और इसकी प्रगति रोकने में सफलता पाना चाहते हैं तो हमें सबसे पहले यह समझना होगा कि धमनीकाठिन्य क्या है, और कौन सी गतिविधियों की वजह से यह होता है और इसके लक्षणों में वृद्धि होती है, ताकि हमें इसके इलाज के बारे में पता चल सके।     


धमनीकाठिन्य धमनी की दीवारों के मोटा और सख्त होने के साथ शुरू होता है, इसलिए उचित रक्त प्रवाह के लिए कोमल बने रहने और प्राकृतिक धमनियों के माध्यम से रक्त की अधिक मात्रा को प्रवाहित करने के बजाय धमनियों की दीवारें सख्त और कठोर हो जाती हैं, 

और इसके सख्त होने के कारण, धमनियों के संकुचन और फैलाव की प्राकृतिक क्षमता समाप्त हो जाती है, जिससे शरीर में रक्त का प्रवाह धीमा हो जाता है, 

यह मुख्य रूप से उन अंगों के लिए घातक होता है जिनमें सख्त धमनी रक्त प्रवाहित करती है, यह शरीर में हृदय, मस्तिष्क या कोई भी अंग हो सकता है। इस जोखिम की वजह से सख्त धमनी के माध्यम से उन अंगों में रक्त, ऑक्सीजन और पोषक तत्वों की आवश्यक मात्रा नहीं पहुँच पाती है। 

यदि ये अंग प्रमुख होते हैं तो खतरा और अधिक बढ़ जाता है, जैसे हृदय और मस्तिष्क जैसे अंग, (Hirai et.al., 1989) , (Ku, 1997) , (Laurent et.al., 2006) .


जो शरीर की समस्त गतिविधियों के लिए आवश्यक माने जाते हैं। अध्ययनों ने दर्शाया है कि अन्य कारकों की वजह से भी काठिन्य  (धमनियों का सख्त होना, और इसकी आवृत्ति बढ़ना) होने का जोखिम बढ़ सकता है। इन्हें प्रत्यक्ष कारण और क्रियाविधि माना जाता है, इन कारकों में से सबसे प्रमुख कारक है धमनियों का उच्च रक्तचाप साथ ही मधुमेह, रक्त में कोलेस्ट्रॉल की ज्यादा मात्रा, और धूम्रपान। ये चारों कारक एथेरोमा होने की प्रत्यक्ष कार्यप्रणालियों और कारकों से अत्यधिक संबंधित हैं। 

जो धमनीकाठिन्य का उन्नत चरण है और धमनी की दीवार के कोमल भाग पर प्रदाहक पदार्थों सहित एकाधिक ऑक्सीकृत-कोलेस्ट्रॉल परतों के संचय के कारण होता है,  पदार्थों के संचय के कारण धमनी का व्यास कम हो जाता है जिससे धमनी पतली हो जाती है, और इसके माध्यम से अंगों में रक्त का प्रवाह धीमा हो जाता है। एथेरोमा के संग्रहण के कारण गलप्रदाह हो सकता है, और व्यायाम के समय ये लक्षण दिखाई देते हैं।  (Kass, 2005) , (Salonen et.al., 1988) , (Howard et.al., 1998) , (Chambless et.al., 2002) , (Ross 1999) , (Maseri et.al., 1983) .


क्योंकि धमनी के सख्त होने के कारण, और एथेरोमा के जमाव की वजह से धमनी से हृदय में जाने वाले रक्त और ऑक्सीजन की मात्रा सामान्य से कम हो जाती है। ऑक्सीजन की मात्रा कम होने के कारण, हृदय की मांसपेशियां अनाक्सीय रूप से (अर्थात ऑक्सीजन के बिना) काम करने लगती हैं  

जिससे हृदय के लिए आवश्यक ऊर्जा की तुलना में कम ऊर्जा उत्पन्न होती है (19 एटीपी के बजाय 2 एटीपी) और ऑक्सीजन की कमी में ग्लूकोस जलने से या इसकी कमी होने के परिणामस्वरूप लैक्टिक अम्ल और ब्यूटिरिक अम्ल जैसे अम्ल भी उत्पन्न होने लगते हैं (Neely, 1974) 


इन अम्लों और अन्य पदार्थों के संचय के फलस्वरूप हृदय मांसपेशी और फाइबर के बीच उत्तेजना उत्पन्न होती है जिससे गलप्रदाह का दर्द होता है,यह तनाव के साथ बढ़ता है और आराम करने से कम होता है(Wilke et.al., 1999) . (Sylvén, 1993)  

और हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि धमनी की दीवार के अंदर जमे एथेरोमा की वजह से इस धमनी की कोमल सतह खुरदुरी और सख्त हो जाती है  

इसकी वजह से रक्त के प्लेटलेट में चिपचिपापन आ जाता है जो किसी भी खुरदुरी सतह के संपर्क में आने से चिपक जाता है। इसके परिणामस्वरूप यकृत द्वारा उत्पादित प्रोटीन फाइबर की सहायता से रक्त के प्लेटलेट चिपक जाते हैं, जिससे पूरी धमनी अवरोधित हो जाती है और इसे रक्त का थक्का या थक्का कहते हैं(Fuster et.al., 1992) , (Badimon et.al., 1993) .

इसके बाद हम समझ सकते हैं कि धमनियां कैसे सख्त होती हैं और शरीर में गलप्रदाह या आघात, थक्के और हृदयाघात और पक्षाघात कैसे होता है

और धमनियों और एथेरोमा को सख्त बनाने वाले मुख्य कारकों और क्रियाविधियों को समझने के बाद, अब हम उन प्राकृतिक उत्पादों की श्रृंखला का प्रयोग करने के लिए संतुलित आहार के उपायों के बारे में जानेंगे जिनसे एथेरोमा के मरीजों को आराम मिलता है

इन प्राकृतिक उत्पादों में ओमेगा-3 भी आता है, अध्ययनों के अनुसार धमनी काठिन्य के कारकों पर ओमेगा-3 का महत्वपूर्ण प्रभाव होता है, यह धमनी का रक्तचाप कम करने में योगदान देता है, इस प्रकार हम धमनी काठिन्य और एथेरोमा की सम्भावना को कम करते हैं,

रक्त के प्लेटलेट के जमाव को कम करके ओमेगा-3 एक अन्य भूमिका निभाता है, जिससे रक्त के थक्के बनने की सम्भावना कम होती है और हृदय और मस्तिष्क आघात रोकने में यह महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।(Lungershausen et.al., 1994) , (Cicero et.al., 2009) , (Irish et.al., 2009)

 ओमेगा-3 रक्त में वसा के स्तरों को कम करने में भी प्रभावी है, विशेष रूप से ट्राइग्लिसराइड

जिससे वसा के स्तरों को कम करने की क्रियाविधि के माध्यम से धमनीकाठिन्य से बचने में हृदय की धमनियों को सहायता मिलती है। 


अध्ययन यह भी बताते हैं कि दौरे वाले हृदय रोगों को तेज हृदय गति के विकारों और कार्डियक अरिदमिया से भी जोड़ा जाता है, जो कभी-कभी घातक हो सकता है, और यहाँ भी ओमेगा-3 की प्रमुख भूमिका होती है, (Lavie et.al., 2009) .

टैकिअरिदमिया में घटती हुई हृदय गति में अरिदमिया (हृदय गति विकार) का प्रभावशाली विपरीत प्रभाव होता है।(Lavie et.al., 2009) , (Harris et.al., 2008) .  

अध्ययनों से पता चलता है कि तीन गंभीर कारकों को समाप्त करके, जैतून के पत्ते धमनीकाठिन्य से बचने में महत्वपूर्ण और कार्यनीतिक भूमिका निभाते हैं। अध्ययनों के अनुसार, सबसे पहले यह धमनियों में रक्तचाप कम करता है(Khayyal et.al., 2002) धमनी की आंतरिक परत को नुकसान पहुँचाने वाले उच्च रक्तचाप की क्रिया में बाधा उत्पन्न करके यह धमनीकाठिन्य और एथेरोमा से बचने में बहुत सहायता करता है।   

इसलिए, हम उन सभी मरीजों को जैतून के पत्ते प्रयोग करने की सलाह देते हैं जिनके पारिवारिक इतिहास में उच्च रक्तचाप की बीमारी है, या जो पहले से प्रारंभिक उच्च धमनीय रक्तचाप की शिकायत करते हैं

प्रारंभिक और माध्यमिक धमनी के उच्च रक्तचाप और उनके उपचार के बीच में अंतर देखें

चूँकि, जैतून का पत्ता मधुमेह नियंत्रित करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, (Wainstein et.al., 2012)  

और उन अध्ययनों से पुष्टि होती है कि धमनीकाठिन्य का उपचार करने में जैतून का पत्ता सर्वश्रेष्ठ भूमिका निभाता है(Wang et.al., 2008)

आघात और हृदय की मांसपेशी पर आघात का जोखिम उत्पन्न करने वाली सभी क्रियाविधियों को निशाना बनाने के लिए, हम आपको खीस प्रयोग करने की सलाह देते हैं, 

जो एक प्राकृतिक राल पदार्थ है जो जन्म देने के बाद पहले 3 दिन मवेशियों के थन से निकलता है)  

ऐसा पाया गया है कि खीस धमनी में थक्का जमने पर इसमें होने वाले ऊतकों की क्षति से बचाता है। थक्का जमने पर, इन ऊतकों में रक्त का प्रवाह धीमा हो जाता है और इसके बाद तेजी से रक्त की धारा प्रवाहित होती है, (Choi et.al., 2008)  हम आपको रक्त संचार में कमी की वजह से होने वाले हृदयाघात की स्थिति में भी खीस प्रयोग करने का सुझाव देते हैं।

खीस में हृदय या मस्तिष्क आघात के बाद क्षतिग्रस्त ऊतकों को पुनर्निर्मित करने की भी क्षमता होती है। इसे ना केवल पोषण कारक के रूप में जाना जाता है, बल्कि यह विकास कारकों से भी परिपूर्ण होता है, (Burrin et.al., 1997)

खीस कोलेस्ट्रॉल स्तर और ट्राइग्लिसराइड का स्तर कम करने में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, और साथ ही मधुमेह में सुधार करके, मधुमेह से ग्रस्त रोगियों में कीटोन पिंडों को बेहतर बनाकर और धमनीकाठिन्य के सभी जोखिमों को ठीक करने की क्षमता के माध्यम से धमनीकाठिन्य से बचने में मदद करता (Kim et.al., 2009)

ज्यादातर धमनीकाठिन्य तंत्रों पर वार करने की क्षमता की वजह से हम खीस का प्रयोग करने का सुझाव देते हैं, क्योंकि अध्ययनों से पता चलता है कि धमनीय रक्तचाप कम करने में इसकी प्रमुख भूमिका होती है

क्योंकि इसमें भरपूर मात्रा में लेक्टोफेरिन मौजूद होता है, जो ना केवल एक तरीके से बल्कि कई तरीकों और रूपों से धमनीय रक्तचाप कम करने में सहायता करता है (Groziak et.al., 2000) .

हम अंगूर के बीजों को इसके एकाधिक गुणों की वजह से प्रयोग करने की सलाह देते हैं क्योंकि हम मानते हैं कि अल्लाह ने कुरान में उल्लेखित किया है कि, "खजूर के पेड़ों और अंगूर के फलों से" (67) नहल  

यह आयत खजूर और अंगूर में मौजूद पोषक तत्वों के लाभ को दर्शाती है, "और खजूर के पेड़ों और अंगूर के फलों से," खजूर और अंगूर के फल में क्या है? 

क्योंकि यह धमनीय रक्तचाप, धमनीकाठिन्य और एथेरोमा कम करने में सहायता करता है।(Quiñones et.al., 2013) .  

अंगूर के बीजों के प्रयोग का प्रभाव केवल इतने तक सीमित नहीं होता, बल्कि कई अध्ययन दर्शाते हैं कि अंगूर के बीज धमनियों के विस्तार (वेसोरिलैक्सेशन) में योगदान देते हैं, यह धमनीय रक्तचाप कम करता है और धमनियां पतली होने पर भी अंगों में रक्त का प्रवाह बेहतर बनाता है। यहाँ हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि

अंगूर के बीज रक्त वाहिकाओं की दीवार को प्रभावी रूप से सुरक्षित रखते हैं इसलिए ये रक्तचाप कम करने की पिछली क्रियाविधि के अतिरिक्त वेसोप्रोटेक्टिव के रूप में भी काम करते हैं

इसलिए, यह धमनियों के कड़ेपन और एथेरोमा (एंटी-एथेरोस्क्लेरोटिक) से बचाता है।(Pons et.al., 2016) .  अध्ययनों से पता चलता है कि इनमें रक्त में कोलेस्ट्रॉल का स्तर कम करने की और हाइपोलिपिडेमिक एवं एंटी-हाइपरकोलेस्ट्रॉलेमिया के रूप में काम करने की क्षमता होती है(Quesada et.al., 2009) . (Terra et.al., 2009) .

दरअसल, एथेरोमा और धमनीकाठिन्य के विरुद्ध इसका यह विपरीत प्रभाव इसे एंटीथ्रोम्बोटिक और स्कन्दनरोधी के रूप में काम करने के भी गुण देता है।(Bijak et.al., 2011)और सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि अंगूर के बीज हृदय को सुरक्षित रखने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं(Bijak et.al., 2011) 

इसमें कोई आश्चर्य नहीं है कि कुरान में लहसुन के बारे में बताया गया है, 

जैसे यह धमनी के उच्च रक्तचाप को कम करने में सहायता करता है pressure (Sharifi et.al., 2003)  जिसे धमनीकाठिन्य का मुख्य कारक माना जाता है, 

लहसुन की प्रभावशीलता को कोलेस्ट्रॉल के स्तर कम करने के द्वारा दर्शाया जाता है।वे दोनों सबसे महत्वपूर्ण तंत्र मने जाते है जो धमनीकाठिन्य का कारण बनता है (Singh et.al., 2006) 

इस लंबी व्याख्या के बाद, यह आश्चर्यजनक नहीं है कि जब हम देखते हैं कि इन प्राकृतिक घटकों के प्रत्येक घटक के कई फायदे हैं और विभिन्न तंत्रों के साथ और किसी भी साइड इफेक्ट और ड्रग इंटरैक्शन के बिना काम करता है, तो यह हमें अपने सर्वशक्तिमान अल्लाह की महानता की याद दिलाता है 


जमिल अल क़ुद्सी

एमडी-एमएससी सीएएम-डुप एफएम 


References:


Adoga, G. I. 1987. The mechanism of the hypolipidemic effect of garlic oil extract in rats fed on high sucrose and alcohol diets. Biochemical and Biophysical Research Communications, 142, 1046-1052.


Badimon, J., Fuster, V., Chesebro, J. & Badimon, L. 1993. Coronary atherosclerosis. A multifactorial disease. Circulation, 87, II3-16.


Bijak, M., Bobrowski, M., Borowiecka, M., Podsędek, A., Golański, J. & Nowak, P. 2011. Anticoagulant effect of polyphenols-rich extracts from black chokeberry and grape seeds. Fitoterapia, 82, 811-817.


Burrin, D. G., Davis, T. A., Ebner, S., Schoknecht, P. A., Fiorotto, M. L. & Reeds, P. J. 1997. Colostrum enhances the nutritional stimulation of vital organ protein synthesis in neonatal pigs. The Journal of Nutrition, 127, 1284-1289.


Chambless, L. E., Folsom, A. R., Davis, V., Sharrett, R., Heiss, G., Sorlie, P., Szklo, M., Howard, G. & Evans, G. W. 2002. Risk factors for progression of common carotid atherosclerosis: The atherosclerosis risk in communities study, 1987–1998. American Journal of Epidemiology, 155, 38-47.


Choi, H. & Ko, Y. 2008. P032 protective effects of bovine colostrum on brain ischemia/reperfusion injury in rat. Clinical Nutrition Supplements, 3, 42.


Cicero, A. F. G., Ertek, S. & Borghi, C. 2009. Omega-3 polyunsaturated fatty acids: Their potential role in blood pressure prevention and management. Current Vascular Pharmacology, 7, 330-337.


Fuster, V., Badimon, J. & Badimon, L. 1992. Clinical-pathological correlations of coronary disease progression and regression. Circulation, 86, III1-11.


Groziak, S. M. & Miller, G. D. 2000. Natural bioactive substances in milk and colostrum: Effects on the arterial blood pressure system. British Journal of Nutrition, 84, 119-125.


Harris, W. S., Miller, M., Tighe, A. P., Davidson, M. H. & Schaefer, E. J. 2008. Omega-3 fatty acids and coronary heart disease risk: Clinical and mechanistic perspectives. Atherosclerosis, 197, 12-24.


Hirai, T., Sasayama, S., Kawasaki, T. & Yagi, S. 1989. Stiffness of systemic arteries in patients with myocardial infarction. A noninvasive method to predict severity of coronary atherosclerosis. Circulation, 80, 78-86.


Howard, G., Wagenknecht, L. E., Burke, G. L. & Et Al. 1998. Cigarette smoking and progression of atherosclerosis: The atherosclerosis risk in communities (aric) study. JAMA, 279, 119-124.


Irish, A., Dogra, G., Mori, T., Beller, E., Heritier, S., Hawley, C., Kerr, P., Robertson, A., Rosman, J., Paul-Brent, P.-A., Starfield, M., Polkinghorne, K. & Cass, A. 2009. Preventing avf thrombosis: The rationale and design of the omega-3 fatty acids (fish oils) and aspirin in vascular access outcomes in renal disease (favoured) study. BMC Nephrology, 10, 1.


Kass, D. A. 2005. Ventricular arterial stiffening. Integrating the Pathophysiology, 46, 185-193.


Khayyal, M. T., El-Ghazaly, M. A., Abdallah, D. M., Nassar, N. N., Okpanyi, S. N. & Kreuter, M.-H. 2002. Blood pressure lowering effect of an olive leaf extract {olea europaed) in l-name induced hypertension in rats. Arzneimittelforschung, 52, 797-802.


Kim, J. H., Jung, W. S., Choi, N.-J., Kim, D.-O., Shin, D.-H. & Kim, Y. J. 2009. Health-promoting effects of bovine colostrum in type 2 diabetic patients can reduce blood glucose, cholesterol, triglyceride and ketones. The Journal of nutritional biochemistry, 20, 298-303.


Ku, D. N. 1997. Blood flow in arteries. Annual Review of Fluid Mechanics, 29, 399-434.


Laurent, S., Cockcroft, J., Van Bortel, L., Boutouyrie, P., Giannattasio, C., Hayoz, D., Pannier, B., Vlachopoulos, C., Wilkinson, I. & Struijker-Boudier, H. 2006. Expert consensus document on arterial stiffness: Methodological issues and clinical applications. European Heart Journal, 27, 2588-2605.


Lavie, C. J., Milani, R. V., Mehra, M. R. & Ventura, H. O. 2009. Omega-3 polyunsaturated fatty acids and cardiovascular diseases. Journal of the American College of Cardiology, 54, 585-594.


Lungershausen, Y. K., Abbey, M., Nestel, P. J. & Howe, P. R. C. 1994. Reduction of blood pressure and plasma triglycerides by omega-3 fatty acids in treated hypertensives. Journal of Hypertension, 12, 1041-1046.


Maseri, A., Chierchia, S., Davies, G. J. & Fox, K. M. 1983. Variable susceptibility to dynamic coronary obstruction: An elusive link between coronary atherosclerosis and angina pectoris. The American Journal of Cardiology, 52, 46-51.


Neely, J. R. & Morgan, H. E. 1974. Relationship between carbohydrate and lipid metabolism and the energy balance of heart muscle. Annual review of physiology, 36, 413-459.


Pons, Z., Margalef, M., Bravo, F. I., Arola-Arnal, A. & Muguerza, B. 2016. Acute administration of single oral dose of grape seed polyphenols restores blood pressure in a rat model of metabolic syndrome: Role of nitric oxide and prostacyclin. European journal of nutrition, 55, 749-758.


Quesada, H., Del Bas, J., Pajuelo, D., Diaz, S., Fernandez-Larrea, J., Pinent, M., Arola, L., Salvadó, M. & Bladé, C. 2009. Grape seed proanthocyanidins correct dyslipidemia associated with a high-fat diet in rats and repress genes controlling lipogenesis and vldl assembling in liver. International journal of obesity, 33, 1007-1012.


Quiñones, M., Guerrero, L., Suarez, M., Pons, Z., Aleixandre, A., Arola, L. & Muguerza, B. 2013. Low-molecular procyanidin rich grape seed extract exerts antihypertensive effect in males spontaneously hypertensive rats. Food Research International, 51, 587-595.


Ross , R. 1999. Atherosclerosis — an inflammatory disease. New England Journal of Medicine, 340, 115-126.


Salonen, R., Seppänen, K., Rauramaa, R. & Salonen, J. T. 1988. Prevalence of carotid atherosclerosis and serum cholesterol levels in eastern finland. Arteriosclerosis, Thrombosis, and Vascular Biology, 8, 788-792.


Sharifi, A. M., Darabi, R. & Akbarloo, N. 2003. Investigation of antihypertensive mechanism of garlic in 2k1c hypertensive rat. Journal of Ethnopharmacology, 86, 219-224.


Singh, D. K. & Porter, T. D. 2006. Inhibition of sterol 4α-methyl oxidase is the principal mechanism by which garlic decreases cholesterol synthesis. The Journal of Nutrition, 136, 759S-764S.


Sylvén, C. 1993. Mechanisms of pain in angina pectoris—a critical review of the adenosine hypothesis. Cardiovascular Drugs and Therapy, 7, 745-759.


Terra, X., FernáNdez-Larrea, J., Pujadas, G., ArdèVol, A., Bladé, C., Salvadó, J., Arola, L. & Blay, M. 2009. Inhibitory effects of grape seed procyanidins on foam cell formation in vitro. Journal of agricultural and food chemistry, 57, 2588-2594.


Wainstein, J., Ganz, T., Boaz, M., Bar Dayan, Y., Dolev, E., Kerem, Z. & Madar, Z. 2012. Olive leaf extract as a hypoglycemic agent in both human diabetic subjects and in rats. Journal of medicinal food, 15, 605-610.


Wang, L., Geng, C., Jiang, L., Gong, D., Liu, D., Yoshimura, H. & Zhong, L. 2008. The anti-atherosclerotic effect of olive leaf extract is related to suppressed inflammatory response in rabbits with experimental atherosclerosis. European Journal of Nutrition, 47, 235-243.


Wilke, A., Noll, B. & Maisch, B. 1999. [angina pectoris in extracoronary diseases]. Herz, 24, 132-139.



videos balancecure


Share it



Subscribe with our newsletter


Comments

No Comments

Add comment

Made with by Tashfier

loading gif
feedback