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शांत हत्यारे और इसके खतरों से बचें, और रसोईघर में मौजूद सरल पदार्थों से अपने जीवन की रक्षा करें।

शांत हत्यारे और इसके खतरों से बचें, और रसोईघर में मौजूद सरल पदार्थों से अपने जीवन की रक्षा करें।


क्या सामान्य चिकित्सीय जांच के दौरान आपको यह जानकर आश्चर्य हुआ कि आपको उच्च रक्तचाप है? क्या कई उच्चरक्तचापरोधी दवाओं के प्रयोग से संबंधित यौन नपुंसकता आपके लिए चिंता का विषय है और आप इससे शर्मिंदा हैं? क्या आपको यह अनुभव होने लगा है कि आपको एक गंभीर समस्या है? यह सत्य है कि ये समस्याएं शांत होती हैं लेकिन इसके कई बड़े जोखिम हैं और इसके उपचारों के लिए उपलब्ध दवाओं के कई दुष्प्रभाव भी हैं। 

यदि आप उच्च धमनीय रक्तचाप के उपचार की तलाश में हैं और इसकी समस्याओं विशेष रूप से धमनीकलाकाठिन्य, आघात पड़ना, मस्तिष्क पक्षाघात या मस्तिष्कीय रक्तस्राव से भयभीत हैं। यदि आप उच्च रक्तचाप के लिए प्रयोग की जाने वाली दवाओं की खुराक को इसकी एकाधिक जटिलताओं और दुष्प्रभावों की वजह से कम करना चाहते हैं तो हम आपको प्राकृतिक जैतून के तेल में कलौंजी का तैलीय सत्त, और सेब के सिरके में कलौंजी का जलीय सत्त प्रयोग करने की सलाह देते हैं, क्योंकि शोधकर्ताओं के अनुसार वे इन क्षेत्रों में आपकी सहायता करते हैं। 

 

2000 में कासाब्लांका, मोरक्को की उपचार पत्रिका में एक अध्ययन प्रकाशित किया गया था, इसमें शोधकर्ताओं ने उच्चरक्तचापरोधी, और मूत्रवर्धक अवरोधक के रूप में कलौंजी के सत्त के प्रभाव का चूहों पर अध्ययन किया था। इस अध्ययन में चूहों को दो समूहों में विभाजित किया गया। पहले समूह को कलौंजी का सत्त दिया गया। दूसरे समूह को कैल्शियम अवरोधक (निफेडीपीन) दिया गया,  जो विशेष क्रियाविधि से काम करके कैल्शियम के प्रवेश को रोकता है, जो मांसपेशी के संकुचन के लिए आवश्यक होता है और यह कैल्शियम को मांसपेशी में जाने से रोकता है। इससे मांसपेशीय फाइबर संकुचित नहीं होते हैं जिसके परिणामस्वरूप धमनीय रक्तचाप कम होता है। (Church et.al., 1980)

इस अध्ययन ने दर्शाया कि कलौंजी का सत्त कैल्शियम अवरोधकों से ज्यादा प्रभावी था। जिन चूहों को कलौंजी का सत्त दिया गया उनके औसत रक्तचाप में 22% तक की कमी हुई, जबकि निफेडीपीन से उपचार पाने वाले चूहों में रक्तचाप 18% तक कम हुआ। इस अध्ययन में यह भी पाया गया कि रक्तचाप कम करने में कलौंजी में अतिरिक्त प्रभाव भी पाए जाते हैं जबकि निफेडीपीन में ऐसा कुछ नहीं था। यह देखा गया कि जिन चूहों को कलौंजी का सत्त दिया गया उनके मूत्र उत्सर्जन में वृद्धि हुई। चूँकि चिकित्सा का नियम हमेशा उच्च रक्तचाप के उपचार के लिए रक्तचाप कम करने में मूत्रवर्धक के प्रयोग को पहले विकल्प के रूप में मानता है। इसलिए, कलौंजी की मूत्रवर्धक और उच्च रक्तचापरोधी भूमिका इसे उच्च रक्तचाप वाले मरीज के उपचार के लिए सबसे उपयुक्त बनाती है।(Zaoui et.al., 1999) 

साथ ही कलौंजी के सत्त में कोई दुष्प्रभाव भी नहीं होते हैं। (Randhawa, 2008) . जबकि अध्ययन में प्रयोग किये गए निफेडीपीन में दुष्प्रभाव पाए जाते हैं, क्योंकि कैल्शियम अवरोधक की वजह से कुछ लोगों को सिरदर्द, चक्कर, हाथ-पैर में सूजन, हृदयगति में वृद्धि, त्वचा पर चकत्ते और सांस फूलने जैसी समस्या हो जाती है।(Russell, 1988)  

चूँकि, हम सहक्रिया के तथ्य की वजह से अपनी संतुलित पौष्टिकता प्रणाली में भरोसा करते हैं, अर्थात, एकल-पदार्थ उपचार पर्याप्त नहीं होता है, जिसे पवित्र कुरान में पाया जा सकता है, जहाँ खाद्य और पेय पदार्थों से संबंधित सभी पाठ और आयतों को बहुवचन और सहक्रिया के रूप में उल्लेखित किया गया है। हमारे जीर्ण रोगों की क्रियाविधि विविध होती है, इसलिए बीमारियों के तंत्रों पर वार करने वाले संयोजक, आहार और क्रियाविधियां भी अलग-अलग होने चाहिए। इसलिए, हम देखते हैं कि पवित्र कुरान अलग-अलग आहारों के बारे में नहीं बताता, बल्कि उन्हें एक समूह के रूप में बताता है, और यह चिकित्सीय सहकारिता के सिद्धांत के अनुकूल है। तो, हमें औषधीय सत्त को जैतून के तेल और सेब के सिरके दोनों में क्यों मिलाना चाहिए? कुरान के कौन से रहस्य इसका कारण हैं

कुरान के सहकारिता के सिद्धांत के प्रयोग से प्राप्त विशेषज्ञता और अनुभवों के आधार पर, हम आपको सर्वश्रेष्ठ लाभ पाने के लिए और उच्च धमनीय दबाव उत्पन्न करने वाले कई क्रियाविधियों में रुकावट उत्पन्न करने के लिए शुद्ध जैतून के तेल में कलौंजी का तैलीय सत्त और सेब के सिरके में कलौंजी का जलीय सत्त प्रयोग करने की सलाह देते हैं।2008 में राष्ट्रीय विज्ञान अकादमी की कार्यवाही पत्रिका में प्रकाशित एक अध्ययन में दिखाया गया कि हमारे उत्पादों के संरक्षक के रूप में कार्य करने वाले जैतून के तेल में ओलिक अम्ल (70-80%) पाया जाता है, जिसमें उच्चरक्तचापरोधी प्रभाव होता है। ओलिक अम्ल और अन्य फैटी अम्लों की वजह से जैतून के तेल का सेवन कोशिका की झिल्ली में ओलिक अम्ल के स्तर में वृद्धि करता है। इन्हें कोशिका झिल्ली की संरचना में आसानी से संयोजित किया जा सकता है। इनके जी-प्रोटीन के साथ परस्पर क्रिया करने की सम्भावना होती है, जो कोशिका झिल्ली की सतह पर सबसे सामान्य संग्राहक होता है। इसलिए, फैटी अम्ल झिल्ली संग्राहक की सतह से कोशिकाओं के अंदर संकेतों के पारगमन को अवरोधित कर सकते हैं, इस प्रकार धमनीय रक्तचाप में कमी होती है। (Terés et.al., 2008) 

2001 में प्रकाशित एक अध्ययन में यह दर्शाया गया था कि उच्च रक्तचाप कम करने में और रक्त के उच्च रक्तचाप के जोखिम को कम करने में प्राकृतिक सेब का सिरका एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, जो हमारे उत्पादों में संरक्षक है। इसका यह प्रभाव प्राकृतिक सेब के सिरके में मौजूद एसिटिक अम्ल की वजह से है, जो सिरके में मौजूद आवश्यक अम्ल है।

हालाँकि, प्राकृतिक सिरके में मौजूद एसिटिक अम्ल, परस्पर क्रियाओं की एक श्रृंखला को प्रभावित करता है जिसकी वजह से धमनीय रक्तचाप कम होता है।

सामान्य स्थिति में रक्तचाप गिरने पर, और रेनिन एंजाइम का क्षय होने की वजह से रक्त प्रवाह कम होने पर गुर्दा एन्जियोटेन्सिन I से एन्जियोटेन्सिन II में एन्जियोटेन्सिन-परिवर्तनशील एंजाइम प्रेरित करता है। (एन्जियोटेन्सिन II रक्त वाहिकाओं के सबसे प्रभावशाली कारकों में से एक है, जिसकी वजह से रक्त वाहिका फैलती और सिकुड़ती है, और इसके परिणामस्वरूप परिधीय संवहनी प्रतिरोध बढ़ता है और उच्च रक्तचाप होता है) चूँकि, सिरके में एसिटिक अम्ल की मात्रा ज्यादा होती है इसलिए यह गुर्दे से निकले हुए रेनिन में बाधा उत्पन्न करता है और इसके परिणामस्वरूप इस श्रृंखला में बाधा उत्पन्न होती है जिससे एन्जियोटेन्सिन II उत्पन्न होता है, जिसकी वजह से रक्तचाप कम होता है।(Kondo et.al., 2001) 

वास्तव में, यहाँ हम इस बात की पुष्टि करते हैं कि उच्च धमनीय रक्तचाप हॉर्मोन-संबंधी, तंत्रिका तंत्र संबंधी और यहाँ तक कि मनुष्य की मनोवैज्ञानिक स्थिति संबंधी, और स्थानीय कारकों संबंधी विभिन्न क्रियाविधियों की वजह से उत्पन्न होता है। इसलिए, उच्च रक्तचाप की इन सभी क्रियाविधियों का सामना करने के लिए तेल और सिरके में केवल कलौंजी का सत्त पर्याप्त नहीं होता है। इसलिए हम आपको विभिन्न प्रकार के सत्तों का प्रयोग करने का सुझाव देते हैं। इस प्रकार, तेल और सिरके में संरक्षित औषधीय सत्तों के प्रयोग से ऐसी ज्यादातर क्रियाविधियों का सामना किया जा सकता है जो धमनीय रक्तचाप में वृद्धि के लिए उत्तरदायी होते हैं। अल्लाह की इच्छा से, ये औषधीय सत्त इन सभी क्रियाविधियों पर भी हमला कर सकते हैं। इस तरीके से, हमें संतुलित पौष्टिकता प्रणाली के सिद्धांत प्राप्त हो सकते हैं "अल्लाह की इच्छा से, यदि बीमारी के मुख्य भाग पर हमला किया जाता है तो इसका उपचार संभव है क्योंकि हर बीमारी के लिए उपचार मौजूद है।" (इमाम मुस्लिम द्वारा वर्णित हदीस)


जमिल अल क़ुद्सी

एमडी-एमएससी सीएएम-डुप एफएम

 



वैज्ञानिक संदर्भ:

Church, J. & Zsotér, T. T. 1980. Calcium antagonistic drugs. Mechanism of action. Canadian journal of physiology and pharmacology, 58, 254-264.

 

Kondo, S., Tayama, K., Tsukamoto, Y., Ikeda, K. & Yamori, Y. 2001. Antihypertensive effects of acetic acid and vinegar on spontaneously hypertensive rats. Bioscience, Biotechnology, and Biochemistry, 65, 2690-2694.

 

Randhawa, M. A. 2008. Black seed, nigella sativa, deserves more attention. J Ayub Med Coll Abbottabad, 20, 1-2.

 

Russell, R. P. 1988. Side effects of calcium channel blockers. Hypertension, 11, II42-4.

 

Terés, S., Barceló-Coblijn, G., Benet, M., Álvarez, R., Bressani, R., Halver, J. E. & Escribá, P. V. 2008. Oleic acid content is responsible for the reduction in blood pressure induced by olive oil. Proceedings of the National Academy of Sciences, 105, 13811-13816.

 

Zaoui, A., Cherrah, Y., Lacaille-Dubois, M. A., Settaf, A., Amarouch, H. & Hassar, M. 2000. [diuretic and hypotensive effects of nigella sativa in the spontaneously hypertensive rat]. Therapie,55,379-382.



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