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कैंसर के विरुद्ध लड़ने में जैतून के तेल और प्राकृतिक सेब के सिरके में संरक्षित तुलसी के सत्त का विशेष प्रभाव

कैंसर के विरुद्ध लड़ने में जैतून के तेल और प्राकृतिक सेब के सिरके में संरक्षित तुलसी के सत्त का विशेष प्रभाव


कैंसर के विरुद्ध लड़ने में जैतून के तेल और प्राकृतिक सेब के सिरके में संरक्षित तुलसी के सत्त का विशेष प्रभाव

कैंसर मनुष्यों को भयभीत और चिंतित करने वाले सबसे घातक रोगों में से एक बन गया है, क्योंकि यह बिना कोई चेतावनी दिए शरीर को तेजी से समाप्त करता है और कीमोथेरेपी, हॉर्मोन और विकिरण उपचार के प्रयोग से चिकित्सा उपचार में विकास के बावजूद अक्सर मृत्यु का कारण बनाता है। कैंसर के कारणों में पर्यावरणीय कारक, जैविक कारक, गलत-अस्वास्थ्यकर-गतिविधियां या खराब जीवनशैली शामिल है। कैंसर से लड़ने और इसका सामना करने के बारे में और अधिक विवरण पाने के लिए हम आपको ये फिल्में देखने की सलाह देते हैं।

चूँकि कैंसर को सबसे घातक बीमारियों में से एक माना जाता है, इसलिए दुनिया भर के वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं के कई अध्ययनों में इसपर मुख्य रूप से ध्यान केंद्रित किया गया है। कैंसर से लड़ने के लिए वैज्ञानिक कैंसर उत्पन्न करने वाले विभिन्न रहस्यमयी कारकों और क्रियाविधियों को जानने के माध्यम से प्रगति कर रहे हैं और आगे बढ़ रहे हैं। संतुलित पोषण प्रणाली में सभी कारकों और क्रियाविधियों पर बारी-बारी से वार करना आवश्यक है, क्योंकि कैंसर से बचने के लिए और इसके उपचार में योगदान देने के लिए यह जरुरी होता है। हमारे रोकथाम के तरीके में मनुष्यों द्वारा सेवन किये जाने वाले खाद्य पदाथों की गुणवत्ता को अल्लाह द्वारा बनाये गए शुद्ध और प्राकृतिक रूप में अवयवों से भरपूर, संतुलित और प्राकृतिक आहारों में बदलना शामिल है। अल्लाह कहते हैं: "और हमने धरती को फैलाया और इसमें अटल पहाड़ स्थापित किये और उसमें हर चीज संतुलित अंदाज़ में उगाई" अल-हिज्र (19)। औषधियां सबसे महत्वपूर्ण प्रकार के खाद्य पदार्थ हैं जिन्हें कैंसर से बचने में उपयोगी माना जाता है, इन्हें छौंकने से लेकर हमारे खाद्य पदार्थों में सुगन्धित स्वाद के रूप में प्रयोग करने के लिए जाना जाता है, लेकिन कैंसर के विरुद्ध इसकी सुरक्षात्मक भूमिका के बारे में लोग बहुत कम जानते हैं।

तुलसी एक विशेष औषधीय और सुगन्धित पौधा है जिसे भोजन में स्वाद के लिए डाला जा सकता है। इसके अतिरिक्त, यह स्वास्थ्य के लिए लाभदायक होता है क्योंकि यह महत्वपूर्ण और रक्षात्मक यौगिकों से भरपूर है जो कैंसर के विरुद्ध लड़ने में मानव शरीर के लिए अत्यधिक आवश्यक होते हैं। तुलसी में यूर्सोलिक अम्ल होता है, जो कैंसर की कोशिकाओं को प्रसारित होने से रोकता है और उन्हें समाप्त करता हैं। (Arshad Qamar et.al., 2010)        

इसके अलावा, तुलसी के सत्त में कई एंटीऑक्सीडेंट होते हैं, जिनमें मुक्त कणों के लिए सुरक्षात्मक प्रभाव होता है जो कोशिकाओं को नुकसान पहुँचाने और कैंसर उत्पन्न करने के लिए मुख्य कारक होते हैं। तुलसी में पाए जाने वाले सबसे महत्वपूर्ण एंटीऑक्सीडेंट फिनॉल और फ्लैवोनॉइड हैं। (Taie et.al., 2010),(Kathirvel et.al., 2012)    

चूँकि, हम सहक्रिया के तथ्य की वजह से अपनी संतुलित पौष्टिकता प्रणाली में भरोसा करते हैं, अर्थात, एकल-पदार्थ उपचार पर्याप्त नहीं होता है, जिसे पवित्र कुरान में पाया जा सकता है, जहाँ खाद्य और पेय पदार्थों से संबंधित सभी पाठ और आयतों को बहुवचन और सहक्रिया के रूप में उल्लेखित किया गया है। हमारे जीर्ण रोगों की क्रियाविधि विविध होती है, इसलिए बीमारियों के तंत्रों पर वार करने वाले संयोजक, आहार और क्रियाविधियां भी अलग-अलग होने चाहिए। इसलिए, हम देखते हैं कि पवित्र कुरान अलग-अलग आहारों के बारे में नहीं बताता, बल्कि उन्हें एक समूह के रूप में बताता है, और यह चिकित्सीय सहकारिता के सिद्धांत के अनुकूल है। इसलिए, हमें जैतून के तेल और सेब के सिरके दोनों में औषधीय सत्त क्यों मिलाना चाहिए? इसके पीछे कुरान के क्या रहस्य हैं? 

कुरान के सहकारिता के सिद्धांत के प्रयोग से प्राप्त विशेषज्ञता और अनुभवों के आधार पर, हम आपको शुद्ध जैतून के तेल में तुलसी का सत्त प्रयोग करने की सलाह देते हैं क्योंकि जैतून का तेल शरीर को कैंसर की कोशिकाओं से बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है क्योंकि इसमें एंटीऑक्सीडेंट के रूप में पॉलीफेनोल मौजूद होता है, जो विघटनकारी प्रक्रिया को रोकता है जो कोशिकाओं को बदलकर कैंसर वाली कोशिकाओं में परिवर्तित करता है। (Owen et.al., 2000)  

इसके अलावा, हम तुलसी के जलीय सत्त को प्राकृतिक सेब के सिरके में प्रयोग करने की सलाह देते हैं। क्योंकि यह सिद्ध किया गया है कि सेब के सिरके में पॉलीफेनोल जैसे कई एंटीऑक्सीडेंट होते हैं, जिनमें से क्वेरसेटिन कोशिका विभाजन की प्राकृतिक प्रक्रिया की संपूर्णता को बनाये रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, साथ ही यह कैंसर की कोशिकाओं से लड़ने में भी सक्षम है। (Srivastava et.al., 2016)  


क्या आपको पता है कि संतुलित पोषण प्रणाली के उत्पादों को निर्माण प्रक्रियाओं के प्रत्येक चरण पर उनका प्राकृतिक संतुलन बनाये रखते हुए निर्मित किया गया है? 

 जमिल अल क़ुद्सी

एमडी-एमएससी सीएएम-डुप एफएम




Arshad Qamar, K., Dar, A., S Siddiqui, B., Kabir, N., Aslam, H., Ahmed, S., Erum, S., Habib, S. & Begum, S. 2010. Anticancer activity of ocimum basilicum and the effect of ursolic acid on the cytoskeleton of mcf-7 human breast cancer cells. Letters in Drug Design & Discovery, 7, 726-736.


Kathirvel, P. & Ravi, S. 2012. Chemical composition of the essential oil from basil (ocimum basilicum linn.) and its in vitro cytotoxicity against hela and hep-2 human cancer cell lines and nih 3t3 mouse embryonic fibroblasts. Natural product research, 26, 1112-1118.


Owen, R., Giacosa, A., Hull, W., Haubner, R., Spiegelhalder, B. & Bartsch, H. 2000. The antioxidant/anticancer potential of phenolic compounds isolated from olive oil. European Journal of Cancer, 36, 1235-1247.


Srivastava, S., Somasagara, R. R., Hegde, M., Nishana, M., Tadi, S. K., Srivastava, M., Choudhary, B. & Raghavan, S. C. 2016. Quercetin, a natural flavonoid interacts with DNA, arrests cell cycle and causes tumor regression by activating mitochondrial pathway of apoptosis. Scientific reports, 6.


Taie, H. a. A., Salama, Z. a.-E. R. & Radwan, S. 2010. Potential activity of basil plants as a source of antioxidants and anticancer agents as affected by organic and bio-organic fertilization. Notulae Botanicae Horti Agrobotanici Cluj-Napoca, 38, 119.




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